फिरोजाबाद: मुख्यमंत्री जी! सरकारी एंबुलेंस लगा रही हैं फर्जी चक्कर, लग रहा लाखों का चूना

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भारत कनेक्ट के स्टिंग–ऑपरेशन में खुली एंबुलेंसों की पोल

घायल इंतजार करते-करते पस्त,एंबुलेंस फर्जी रूप से टारगेट पूरा करने में मस्त

फिरोजाबाद। जिस प्रकार एक विद्यार्थी स्कूल से मिले होमवर्क को पूरा न कर पाने के बाद सजा से बचने के लिए घर से स्कूल जाने के बजाय घंटा गोल करता है और स्कूल की छुट्टी के समय पर घर पहुंच जाता है जिससे उक्त विद्यार्थी के परिजनों को भी लगे कि हमारा बच्चा स्कूल गया था और विद्यार्थी स्कूल में होमवर्क न करने से मिलने वाली सजा से भी बच जाता है। ठीक इसी प्रकार जनपद में संचालित सरकारी एंबुलेंस अपने कार्य को संपादित कर रही हैं। टालक्ष्य पूरा करने के लिए एंबुलेंस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक बिना किसी घायल व्यक्ति को लिए फर्जी रूप से को घुमाया जा रहा है और एंबुलेंस द्वारा फर्जी चक्कर लगाने के चलते असली घायल व्यक्ति सरकारी एंबुलेंस के इंतजार में दम तोड़ देते हैं।


आपको बता दे कि भारत कनेक्ट की टीम को काफी समय से सरकारी एम्बुलेंस द्वारा किए जा रहे फर्जीवाड़े की गुप्त सूचना प्राप्त हो रही थी। बुधवार को हमारी टीम ने मेडिकल कॉलेज में पहुंचकर स्टिंग–ऑपरेशन किया क्योंकि फर्जीवाड़े की सबसे अधिक सूचना यहीं से प्राप्त हो रही थी। भारत कनेक्ट की टीम प्रातः 7:00 बजे मेडिकल कॉलेज पहुंच गई जहां पर आधा दर्जन के करीब सरकारी एंबुलेंस पहले से खड़ी पाई जाती हैं। हमारी टीम पास ही एक स्थान पर इंतजार करने लग जाती है। कुछ समय उपरांत प्रातः 8:25 पर वहां खड़ी एंबुलेंस में से UP32EG0490 नंबर की सरकारी एंबुलेंस निकलती है जिसका हमारी टीम पीछा करती है। एंबुलेंस मध्यम गति से चलती हुई 30 मिनट में अस्पताल से लगभग 7 किलोमीटर दूर गांव नगला गोला पहुंचती है। वहाँ पर एंबुलेंस लगभग 10 मिनट रूकती है तथा एंबुलेंस चालक जलपान करता है। बिना किसी मरीज या घायल को लिए फिर उक्त एम्बुलेंस 9:14 पर टूंडला टोल टैक्स के समीप पहुंचती है। फिर बिना किसी मरीज या घायल को लिए वहां से सीधा यूटर्न लेकर 9:25 पर राजा के ताल पर खड़ी हो जाती है, जहां पर उक्त एंबुलेंस लगभग 5 से 7 मिनट रूकती है तथा यहां भी एंबुलेंस में कोई मरीज या घायल व्यक्ति नहीं बैठता और फिर बाईपास की तरफ चल देती है।

बता दे कि सरकारी 102 व 108 नंबर की एंबुलेंस का संचालन एक प्राइवेट कंपनी करती है और इस संचालन कंपनी को सरकार लाखों करोड़ों रुपए का भुगतान इसलिए करती है कि घायल व्यक्ति हो या गर्भवती महिलाएं इन सभी को सरलता के साथ निशुल्क अस्पताल तक समय से पहुंचाया जा सके लेकिन प्राइवेट एंबुलेंस की भरमार और उनके द्वारा बिछाए जाल में पीड़ित मरीज फस जाते हैं और मोटी रकम देकर प्राइवेट एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचते हैं। जिसके चलते सरकारी एंबुलेंस अपना टारगेट पूरा नहीं कर पाती और इस प्रकार फर्जी रूप से गाड़ी का संचालन कर टारगेट पूरा करती है। अब देखना बाकी रह जाता है कि क्या जनपद के जिम्मेदारों द्वारा सरकारी एंबुलेंसो द्वारा किए जा रहे इस फर्जीवाड़े की गहनता से जांच कर कोई कार्रवाई की जाएगी या सरकार को यूं ही लाखो का चूना लगता रहेगा।

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