Home उत्तर प्रदेश गोंडा सदर तहसील में रिश्वत का वीडियो वायरल, अफसरों कब पड़ेगी निगाह?

सदर तहसील में रिश्वत का वीडियो वायरल, अफसरों कब पड़ेगी निगाह?

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गोंडा। सदर तहसील में कथित रिश्वतखोरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो में तहसीलदार के स्टेनो कक्ष में तैनात बताए जा रहे एक एआरके बाबू और फरियादी के बीच रुपये के लेनदेन की बातचीत दिखाई दे रही है। हालांकि, हिंदी दैनिक भारत कनेक्ट वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।वायरल वीडियो में फरियादी पहले 200-200 रुपये के दो नोट देता दिखाई देता है। बाबू कथित तौर पर रकम लेने से इनकार करता है। फरियादी के आग्रह के बाद रकम बढ़ाने की बात सामने आती है। इसके बाद फरियादी 300 रुपये और निकालकर देता दिखाई देता है। कुल 500 रुपये दिए जाने के बाद बाबू कथित तौर पर 100 रुपये वापस करता नजर आता है।वीडियो में कमरे में मौजूद एक अन्य व्यक्ति की बातचीत भी सुनाई देती है। वह कथित तौर पर सुबह से शाम तक ‘बोहनी’ नहीं होने की बात कहता है। वीडियो के इस हिस्से को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर जारी है।

वायरल वीडियो ने खड़े किए कई सवाल

यदि वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान जांच में सही पाई जाती है तो मामला गंभीर है। सवाल यह है कि तहसील जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय में फरियादियों से कथित लेनदेन की स्थिति क्यों बन रही है और इसकी निगरानी कौन कर रहा है?सदर तहसील में कर्मचारियों पर रुपये लेने के आरोपों से जुड़े वीडियो पहले भी सामने आने की चर्चाएं रही हैं। इसके बावजूद यदि फिर ऐसा वीडियो सामने आया है तो यह प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

डीएम साहब कब होगी जांच कार्रवाई ?

वायरल वीडियो के बाद सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन से है—यदि जांच में रिश्वत लेने की पुष्टि होती है तो कार्रवाई कब होगी? फरियादियों के काम के बदले रुपये मांगने या लेने की शिकायतों को केवल आश्वासन तक सीमित रखने के बजाय निष्पक्ष जांच की जरूरत है।एसडीएम सदर जितेंद्र गौतम ने बताया कि उन्हें अभी ऐसे किसी वीडियो की जानकारी नहीं है। वह मामले की जानकारी कराकर वीडियो को दिखवाएंगे। तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।अब निगाह जिला प्रशासन की जांच पर है कि वायरल वीडियो को महज सोशल मीडिया की चर्चा माना जाता है या इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है।

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