प्रधान की तानाशाही: “जहां जाना है जाओ, रोड तभी बनेगा जब हम चाहेंगे”—आक्रोशित ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

छिबरामऊ, कन्नौज। ग्राम सभा धमे के ताल स्थित मोहल्ला तेजराम नगला में दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने स्थानीय प्रशासन और ग्राम प्रधान के विकास दावों की पोल खोलकर रख दी है। पूरा मोहल्ला तालाब में तब्दील हो चुका है, जिससे ग्रामीणों का पैदल चलना तक दूभर हो गया है। जगह-जगह भरे गंदे पानी के कारण गांव में संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं और लोग लगातार तेज बुखार की चपेट में आ रहे हैं।

सड़कों की जगह कच्ची पगडंडियां, हादसे का डर
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पक्की सड़क नाम की कोई चीज नहीं है। चारों तरफ कच्चा रास्ता होने के कारण बारिश का पानी रास्तों में भर गया है। इससे न केवल बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, बल्कि आए दिन हादसों और दुर्घटनाओं का डर बना रहता है। जलभराव के बीच जीवन-यापन कर रहे लोग इलाज और मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

10 साल से एक ही प्रधान का कब्जा, विकास कार्य शून्य
मोहल्ले के ग्रामीणों—अशफाक, लतीफ, युसूफ अली, शमा, इकरार, अकरम, इरशाद, इंतजार, गुलजार, तारिक, खालिद, बिल्लू, असीम, नसीम, शकील और मनीष आदि ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि धमे के ताल में पिछले 10 वर्षों से एक ही व्यक्ति प्रधान पद पर काबिज है। लगातार सत्ता में रहने के कारण प्रधान की रौब इस कदर बढ़ गया है कि गांव में कोई विकास कार्य नहीं कराया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी वे सड़क और जल निकासी की समस्या को लेकर प्रधान के पास जाते हैं, तो उन्हें सहयोग के बजाय दबंगई का सामना करना पड़ता है। प्रधान का साफ कहना होता है कि “रोड नहीं बनेगा, तुम्हें जहां जाना है चले जाओ, जब हम चाहेंगे तभी रोड बनेगा।” प्रधान के रसूख किस्म के रवैये के कारण लंबे समय से कोई खुलकर आवाज उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
बीमारियों, गंदे पानी और बदहाल रास्तों से तंग आ चुके ग्रामीणों ने अब शासन और प्रशासन के उच्चाधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव में अविलंब जल निकासी की व्यवस्था की जाए, पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए और विकास कार्यों में बाधा डाल रहे प्रधान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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