आचार्य श्रीहरि
डोनाल्ड ट्रंप जैसा नमक हराम, दगाबाज , झूठा , पैंतरेबाज और अविश्वसनीय शासक दुनिया में खोजने से भी नहीं मिलेंगे, सुबह की अपनी बात को रात होते ही नकार देना, रात की अपनी बात को सुबह होते ही नकार देने की बेशर्मी सिर्फ और सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप ही दिखा सकता है, इस प्रशंग में वह दुनिया में अकेला शासक है। कब किसी देश का प्रशंसक हो जाएगा, कब किसी देश का विरोधी हो जाएगा, यह कहना मुश्किल है। दुनियां के जनमत में यह बात बैठी है कि डोनाल्ड ट्रंप से न दोस्ती अच्छी है और न ही दुश्मनी अच्छी है। दोस्ती में वह कब धोखा दे दे, यह कहना मुश्किल है, दुश्मनी तो उससे और भी खतरनाक है, उसके फरमान को न मानने वाले कमजोर देशों को तहस नहस कर देता है, अपने विरोधी देश के राष्ट्रपति का अपहरण कर लेता है, अपनी जेलों में डाल कर कैद कर लेता है। कनाडा की संप्रभुता को वह रौंदना चाहता है, कनाडा की संप्रभुता स्वतंत्र है, वह एक आजाद देश है फिर भी डोनाल्ड ट्रंप कहता है कि कनाडा को अमेरिका का प्रदेश बनाना ही पड़ेगा, अगर कनाडा अपना अस्तित्व संहार करने के लिए तैयार नहीं होता है, यानी कि वह अपना विलय अमेरिका में नहीं करना चाहता है तो हम उसे सबक सिखाएंगे, उसकी संप्रभुता को हम स्वयं संहार कर देंगे। ईरान को उसने कब्र बना दिया, आज ईरान के निर्दोष जिंदगियां आवश्यक सुविधाओं के अभाव में बेमौत मरने के लिए विवश है। भारत जैसे दुनियां का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भी डोनाल्ड ट्रंप की पैंतरेबाजी का शिकार है जबकि आतंकी देश पाकिस्तान को वह गले भी लगाता है, पाकिस्तान के खूंखार सेनापति मुनीर को अमेरिका आमंत्रित कर चरण वंदना करता है। वह अपने दोस्त और अमेरिका का हर समय साथ देने के लिए प्रेरित रहने वाले इस्राइल को भी दगा दे देता है और प्रतिरक्षा के लिए उसके हाथ बांध देता है, हमास और हिज्बुल्लाह पर कार्रवाई करने से इस्राइल को रोक देता है।
अभी अभी ट्रंप की नई दगाबाजी देखकर दुनिया हैरान है और परेशान है, और यह सोचने के लिए विवश हुआ कि अपने हित के लिए किसी को भी वह बलि चढ़ाने से भी पीछे नहीं हटेगा। उसने अपने हित में यूक्रेन की बलि चढ़ाई है, उसके इस अपराध से करोड़ों लोगों की आजादी छीनेगी, करोड़ों लोगों पर हिंसा ग्राह बनेगी, बुनियादी सुविधाएं नष्ट होंगी, जिससे मानवता तड़पेगी, मानवता का संहार होगा। यूक्रेन के भविष्य और यूक्रेन की आजादी की कीमत पर ट्रंप ने अपने हित साधे है। ट्रंप की डीजल पेट्रोल कूटनीति यूक्रेन के काल बन गई और रूस के लिए वरदान बन गई। ब्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप ने डीजल पेट्रोल समझौता किया है। इस समझौते के अनुसार अमेरिका रूस से सस्ता डीजल पेट्रोल खरीदेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने डंके की चोट पर इस समझौते को सार्वजनिक किया है। उसने अपने बयान में कहा है कि रूस से सस्ता डीजल पेट्रोल खरीद कर अमेरिका अपने यहां महंगाई को थामेगा, महंगा डीजल और पेट्रोल से अमेरिका की अर्थव्यवस्था तबाह थी और अमेरिकी नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। रूस का राष्ट्रपति बहुत पैंतरेबाज है, वह दयावान नहीं है, वह भी ट्रंप की तरह ही पैंतरेबाजी में महारत है। उसने सस्ते डीजल और पेट्रोल देने की बहुत बड़ी कीमत भी वसूली है। उसने यूक्रेन पर घातक और अतिसंहारक हथियारों से हमला करने का अधिकार हासिल कर लिया, उसने अपने बर्बर और अमानवीय हमलों का अधिकार हासिल कर लिया, उसने यूक्रेन के बिजली घरों और तेल कारखानों पर हमले का भी अधिकार ले लिया। डोनाल्ड ट्रंप ने यह अधिकार रूस को दे दिया। ट्रम ने पुतिन को कह दिया कि मुझे अपना हित अनिवार्य है, जरूरी है, भाड़ में जाए यूक्रेन, आप जैसा हमला करेंगे वैसा मुझे मंजूर है, हम विरोध नहीं करेंगे, कोई मानवता हनन की बात नहीं कहेंगे, इतना ही नहीं बल्कि हम यूक्रेन पर रूस के अधिकार पर भी विरोध नहीं करेंगे। जेलेंस्की को आत्म समर्पण कर देना चाहिए, जेलेंस्की पागल है।
जेलेंस्की का पक्ष सुन लीजिये, उनकी पीड़ा सुन लीजिये, उनका अपने देश के प्रति प्रेम, समर्पण और अपने देश के लिए बलिदान होने का जज्बा भी जान लीजिये। डोनाल्ड ट्रंप को उन्होंने सीधे लताड़ दिया, ट्रंप को धोखेबाज तक कह दिया। उन्होंने ट्रंप और पुतिन की इस डील को नकार दिया। जिलेस्की ने अपने एक बयान में कह दिया कि हम अपने देश की सुरक्षा खुद करेंगे, मर जाएंगे, मिट जाएंगे पर पुतिन के सामने झुकेंगे नहीं। रूस ने ट्रंप का साथ मिलने से यूक्रेन पर कब्जा करने और उसे गुलाम बनाने का सपना देखने लगा। रूस ने यूक्रेन पर ताबड़ तोड़ हमले किए हैं, युद्ध की सारी परम्पराओं को उसने तोड़ दिया। युद्ध परम्परा यह है कि आबादी वाले क्षेत्रों पर हमले नहीं किए जाते हैं, जन की आवश्यक स्थलों और जन सुविधाओं पर हमले करने से परहेज किया जाता है। पर रूस ने ताजा हमलों में निशाना भी इन्हीं क्षेत्रों पर साधा है। खासकर बिजली घरों को नष्ट करने की नीति उसकी काफी घातक और बर्बर है। कई बड़े बिजली घरों को नष्ट कर दिया गया। जिलेस्की ने अपनी पीड़ा जताते हुए कहा है कि बिजली घरों के नष्ट होने से दो करोड़ लोग अंधेरे का सामना करने के लिए विवश है। बिजली जाने का अर्थ सिर्फ अंधेरा ही नहीं होता है बल्कि जीवन की पूरी संरचना प्रभावित होती है, आधुनिक युग का सिस्टम और व्यापार, शिक्षा तक तबाह हो जाता है। डीजल पेट्रोल डील के पहले ऐसे घातक और अतिसंहारक हमला करने का साहस भी रूस नहीं कर पाता था और यूक्रेन भी अपना बचाव करने के लिए सफल रहता था। लेकिन अमेरिका ने एकाएक सामरिक इनपुट देना बंद कर दिया, यानी कि रूस के हथियारों के एक्टिव होने की जानकारी अमेरिका ने देना बंद कर दिया। अब यूक्रेन को ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी। ऐसी तकनीक विकसित करने में समय लगेगा, उसे यूरोप के अन्य देशों से याचना करनी पड़ेगी।
ट्रंप का दोहरापन देख लीजिए। उसकी बेशर्मी की हद देख लीजिए। उसने रूस से तेल खरीदने वाले देशों को धमकाने की कोई कसर नहीं छोड़ी थी। खासकर चीन और भारत को उसने निशाना बनाया था। चीन एक अराजक और हिंसक देश है, इसलिए उसने अमेरिका को जैसे के तैसे कसौटी पर जवाब दे दिया। पर भारत को ट्रंप का गुस्सा भुगतना पड़ा, बार बार भारत को धमकाया गया, भारत विरोधी बातें बोली गई, भारत को पाकिस्तान का डर दिखाया गया, तरह तरह की अन्य धमकियां दी गई। इतना ही नहीं बल्कि भारत पर टैरिफ का दांव भी खेला गया, भारत पर मनमाना टैरिफ लगाया गया और भारत की अर्थव्यवस्था को कुचलने का अमेरिकी प्रयास जारी रहा। पर भारत की मोदी सरकार ने चुपचाप रहकर अपनी अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया, निर्यात के नए मार्ग तलाशे, रूस और यूरोप के देशों से अपनी मित्रता विकसित किया। फिर भारत की अर्थव्यवस्था ट्रंप टैरिफ में नहीं फंसी, ट्रंप टैरिफ को भारत ने बेअसर कर दिया। आज भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर है और दुनिया के लिए प्रेरित भी है। जब अमेरिका अपने हित के लिए रूस से डीजल और पेट्रोल खरीद सकता है तो फिर भारत ऐसा क्यों नहीं कर सकता है?
अमेरिका में ही महंगाई नहीं बढ़ी है, पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी है, जीवन मुसीबत में फंसा है। इसका एक मात्र जिम्मेदार ट्रंप है। इसने टैरिफ नीति से अमरीकी अर्थव्यवस्था को भी चैपट किया। ईरान पर हमला कर इसने दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी चैपट किया, तबाही मचाई। हॉर्मूज नहर को ईरान की कुदृष्टि और हमले से बचाना ट्रंप की जिम्मेदारी थी। पर ट्रंप ने हॉर्मूज नहर को असुरक्षित छोड़ कर भागने का काम किया। हॉर्मूज नहर से आवाजाही हिंसा के शिकार होने के कारण दुनिया के कई देशों को परेशानी हुई, तेल गैस के दाम बढ़ें, फलस्वरूप महंगाई बढ़ी।
ट्रंप की इस धोखेबाजी का इलाज क्या है, ट्रंप की गुंडागर्दी, अमानवीय नीतियों को समाधान क्या है? दुनिया के सामरिक शक्तियां बेअर्थ साबित हो गई हैं। छोटे देशों पर संयुक्त राष्ट्र संघ का तलवार तो खूब चलती है पर अमेरिका के सामने संयुक्त राष्ट्र संघ भी चरण वंदना की स्थिति में होता है। क्या ऐसी स्थिति में हमें तो अमेरिकी सत्ता से ट्रंप की विदाई तक इंतजार करना पड़ेगा ?
कैसे रुकेगी ट्रंप की विश्व गुंडागर्दी? ट्रंप ने दुनिया की शांति की भी तबाही मचाई


