Home उत्तर प्रदेश उन्नाव नवाबगंज में हर तीसरे दिन टैंकर, फिर भी खाद्य विभाग बेखबर

नवाबगंज में हर तीसरे दिन टैंकर, फिर भी खाद्य विभाग बेखबर

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सरसों के तेल के कथित कारोबार पर सवाल, टैंकर से गोदाम और बाजार तक पूरे नेटवर्क की जांच की मांग

उन्नाव। नवाबगंज कस्बे में सरसों के तेल के कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्षेत्र में हर तीसरे-चौथे दिन तेल का टैंकर पहुंचता है। इसके बाद तेल कहां उतारा जाता है, किस गोदाम में रखा जाता है और किन थोक व फुटकर कारोबारियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचता है, इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। सबसे बड़ा सवाल खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर है।
लोगों का कहना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर तेल की आवक हो रही है तो विभाग के पास इसकी जानकारी और पूरा रिकॉर्ड होना चाहिए। टैंकर में कितना तेल आया, किसके नाम पर आया, कहां उतरा और आगे कितनी मात्रा में बिक्री हुई—इन सवालों का जवाब जांच से ही सामने आ सकता है।
दशकों से कारोबार, निगरानी पर सवाल
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सरसों के तेल के कारोबार को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रही हैं। तेल की गुणवत्ता और कथित मिलावट को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि विभाग द्वारा समय-समय पर कितने नमूने लिए गए और उनकी जांच में क्या सामने आया।
यदि कारोबार नियमों के अनुसार संचालित हो रहा है तो जांच के बाद स्थिति पूरी तरह साफ होनी चाहिए। वहीं, यदि कहीं नियमों का उल्लंघन या मिलावट मिलती है तो कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित न रहकर पूरे सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचनी चाहिए।

टैंकर से बाजार तक खंगाली जाए पूरी सप्लाई चेन
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए टैंकर से लेकर गोदाम, थोक व्यापारी और फुटकर दुकानदार तक पूरी सप्लाई चेन की पड़ताल जरूरी है। खरीद-बिक्री के बिल, स्टॉक रजिस्टर, लाइसेंस, जीएसटी दस्तावेज और टैंकरों की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाए। साथ ही अलग-अलग स्थानों से तेल के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।
स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की कथित मिलीभगत और अवैध उगाही की चर्चाएं भी हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चर्चाओं में कितनी सच्चाई है।
सवाल टैंकर का नहीं, पूरे नेटवर्क का
मामला किसी एक कारोबारी को कटघरे में खड़ा करने का नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। इसलिए जांच ऐसी होनी चाहिए जिसमें किसी को भी बिना प्रमाण दोषी न ठहराया जाए और किसी को प्रभाव के चलते जांच के दायरे से बाहर भी न रखा जाए।
अब जरूरत सूत्रों की चर्चाओं से आगे बढ़कर दस्तावेजी रिकॉर्ड और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर सच्चाई सामने लाने की है। यदि तेल मानकों के अनुरूप है तो विभाग स्थिति स्पष्ट करे और यदि गड़बड़ी मिलती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
जनता को शुद्ध सरसों का तेल चाहिए, कागजी खानापूर्ति नहीं। सवाल सिर्फ टैंकर के आने का नहीं, बल्कि टैंकर से उतरने वाले तेल के पूरे सफर का है।

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