प्रशिक्षक बागवानी, कृषि की सिखा रहे बरीकी
चित्रकूट। पाठा क्षेत्र के किसानों को बागवानी के साथ प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से 18 अगस्त को पांच गांवों के 30 महिला-पुरुष किसानों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का आयोजन अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान द्वारा हार्वेस्ट परियोजना के सहयोग से किया गया।
प्रशिक्षण में मोटवन, बम्बिहा, टिकरिया, डोडा माफी और डोडा कोलान सहित आसपास के गांवों के किसानों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण में प्रशिक्षक सुरेन्द्र कुमार कुशवाहा एवं देशराज यादव ने किसानों को बागवानी तथा प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। सुरेन्द्र कुमार कुशवाहा ने बताया कि पाठा क्षेत्र की जलवायु और परिस्थितियों को देखते हुए आंवला, अमरूद, नींबू, मुनगा, बेल और जामुन जैसे फलदार एवं बहुउपयोगी पौधों का रोपण किसानों के लिए लाभकारी हो सकता है। उन्होंने किसानों को बागवानी को प्राकृतिक खेती से जोड़ने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले जैविक इनपुट तैयार किए जा सकते हैं। घन जीवामृत और द्रवजीवामृत जैसे उत्पादों के माध्यम से खेत की मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा खेती की लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को पर्यावरण, पशु-पक्षियों और मानव जीवन के लिए अनुकूल बताते हुए किसानों से इसे अपनाने का आह्वान किया। प्रशिक्षक देशराज यादव ने किसानों को जैविक कीट प्रबंधन की जानकारी देते हुए नीमास्त्र, अग्नियास्त्र एवं ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक कृषि इनपुट तैयार करने की विधि समझाई। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती को व्यवहारिक रूप से अपनाने में रुचि दिखाई। प्रशिक्षण के अंतिम सत्र में भरतलाल ने प्रशिक्षकों, किसानों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा प्रशिक्षण के समापन की घोषणा की।
कार्यक्रम में भरतलाल, देवकुमार, सूरज कुमार, सरला साकेत मौजूद रहे।


