सड़क किनारे बनाया कचरे का पहाड़, ग्रामीणों का जीना मुहाल

छिबरामऊ कन्नौज। एक तरफ जहां सरकार स्वच्छता अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका परिषद छिबरामऊ की कार्यप्रणाली इस दावे की धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है। छिबरामऊ के बहवलपुर गांव में सड़क किनारे पालिका प्रशासन द्वारा खुलेआम कचरे का अंबार लगा दिया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र बदबू और बीमारियों की चपेट में आ गया है।

गाड़ियों का तांता, खुलेआम फेंका जा रहा कूड़ा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नगर पालिका छिबरामऊ की गाड़ियां (कचरा वाहक वाहन और ट्रैक्टर-ट्रॉली) कतार लगाकर बहवलपुर गांव की सीमा में सड़क किनारे कूड़ा डंप कर रही हैं। ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के नारों से सजी ये गाड़ियां खुद ही गांव के मुहाने को ‘कचराघर’ बनाने में जुटी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे नगर पालिका क्षेत्र का गंदगी-कूड़ा लाकर इसी एक स्थान पर उड़ेला जा रहा है, शहर को साफ-सुथरा दिखाने की होड़ में ग्रामीण अंचल की जनता की सेहत को पूरी तरह दांव पर लगा दिया गया है। सवाल यह उठता है कि क्या गांवों की जनता को साफ हवा और स्वच्छ वातावरण का अधिकार नहीं है?

बदबू से घुट रहा दम, महामारी का मंडराया खतरा

सड़क किनारे लगे कूड़े के इस विशाल ढेर से उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण राहगीरों का वहां से गुजरना तक दूभर हो गया है। सबसे बुरा हाल बहवलपुर के ग्रामीणों का है, जिन्हें दिन-रात इस सड़ते कचरे की बदबू में सांस लेने को मजबूर होना पड़ रहा है, भीषण गर्मी और बारिश के मौसम में इस कचरे पर मक्खियां, मच्छर और जहरीले कीड़े पनप रहे हैं, ग्रामीणों को डर है कि यदि जल्द ही इस डंपिंग यार्ड को हटाया नहीं गया, तो गांव में डेंगू, मलेरिया, हैजा और त्वचा संबंधी भयंकर बीमारियां फैल सकती हैं।
नगर पालिका की इस तुगलकी नीति से बहवलपुर गांव के निवासियों में भारी आक्रोश और गुस्सा व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि “शहर का कचरा हमारे मुंह पर फेंका जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।”
अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी नींद से जागते हैं या बहवलपुर के ग्रामीण यूं ही पालिका की इस मनमानी और गंदगी का दंश झेलने को मजबूर रहेंगे।

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