रशीदपुर तराई में धरातल पर काम का ‘सूफड़ा साफ’- लगभग एक महीने से चल रहा 38 मजदूर प्रतिदिन का फर्जीवाड़ा,
फर्रुखाबाद। विकास खंड शमसाबाद क्षेत्र के ग्राम पंचायत रशीदपुर तराई में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (बीजी रामजी योजना) के तहत चल रहे विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां धरातल पर विकास कार्य पूरी तरह से ठप हैं, जबकि ऑनलाइन पोर्टल पर पिछले 10 अगस्त से 38 मजदूरों की फर्जी हाजिरी धड़ल्ले से अपलोड की जा रही है जो आजतक बदस्तूर जारी है।
इस पूरे खेल में ग्राम रोजगार सेवक और ब्लॉक के एपीओ (अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी) कुलदीप यादव की सीधी मिलीभगत और शह शामिल है। योजना के नियमों को ताक पर रखकर कागजों में ही फर्जी मस्टररोल चलाए जा रहे हैं और मजदूरों के नाम पर आने वाली धनराशि का सुनियोजित तरीके से बंदरबांट किया जा रहा है,
मौके पर स्थिति यह है कि गांव में इस योजना के तहत किसी भी प्रकार का वास्तविक धरातलीय कार्य नहीं कराया जा रहा है। भौतिक सत्यापन करने पर कार्यस्थल पर एक भी मजदूर काम करता नजर नहीं आता, जबकि विभागीय पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार बड़ी संख्या में (38) श्रमिक सक्रिय दिखाए जा रहे हैं। बिना श्रम किए ही मजदूरों की हाजिरी दर्ज होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि कागजों की आड़ में बड़े पैमाने पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
स्थानीय ग्रामीणों ने इस भ्रष्टाचार की कई बार मौखिक शिकायत करने का प्रयास किया,लेकिन एपीओ और संबंधित जिम्मेदारों की साठगांठ के चलते धरातलीय अनियमितताओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है,कहने को तो पोर्टल पर फेस आईडी से ही हाजिरी अपलोड होगी,लेकिन धरातल पर काम भी तो होना है,लेकिन ऐसा नहीं हुआ,होता भी कैसे जब एपीओ कुलदीप यादव का संरक्षण रोजगार सेवक ब प्रशासक को प्राप्त है। वही चकरोड के इर्द गिर्द खेतों में कार्य कर रहे किसानों से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्होंने आज तक किसी को चकरोड पर कार्य करते हुए तो नहीं देखा लेकिन रोजगार सेवक द्वारा कुछ लोगों को लाकर उनका फोटो खींचते हुए जरूर देखा है।
जब इस संबंध में डी सी मनरेगा कपिल कुमार से जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि वह अभी एपीओ से जानकारी कर आप को बताएंगे लेकिन इसके बाद डी सी मनरेगा कपिल कुमार द्वारा जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा गया।

