प्रधानों और सचिवों से कथित वसूली कर अधिकारियों तक पहुंचाने का आरोप, जांच और कार्रवाई पर उठे सवाल
बांदा। विकास भवन स्थित जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय में कई वर्षों से तैनात वंश नामक कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति पर ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों से कथित तौर पर कमीशन लेकर अधिकारियों तक पहुंचाने तथा पंचायतों में होने वाले कार्यों में भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों का दावा है कि वंश कई वर्षों से डीपीआरओ कार्यालय में तैनात है और उसके पास आय से अधिक संपत्ति होने की भी चर्चा है। आरोप है कि बिसंडा, बबेरू, तिंदवारी और कमासिन सहित कई विकासखंडों की ग्राम पंचायतों में लंबे समय से तैनात कुछ सचिवों पर विभागीय अधिकारियों की विशेष मेहरबानी बनी हुई है। वहीं, शिकायतों और अनियमितताओं के बावजूद संबंधित सचिवों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कुछ ग्राम प्रधानों और सचिवों ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाया कि कार्यालय में होने वाले कई कार्यों में कथित कमीशनखोरी का खेल चलता है। उनका दावा है कि वंश के माध्यम से रकम अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है। आरोप यह भी हैं कि इसी व्यवस्था के चलते कुछ सचिवों को कई-कई ग्राम पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है और शिकायतों के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित कर्मचारी कर्मचारियों का पक्ष आने पर खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और विभागीय उच्चाधिकारी इन गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जांच कराएंगे? क्या वर्षों से एक ही कार्यालय में तैनात कर्मचारी की भूमिका और कथित संपत्ति की जांच होगी? या फिर मामला अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।



