पांच साल पहले आवास के लिए किया था आवेदन, पात्रता सूची में नाम आने के बाद भी कट गया आवास
उन्नाव। जिस पक्की छत के लिए परिवार पांच साल से सरकारी मदद की आस लगाए बैठा था, वही आस बुधवार को मातम में बदल गई। मसवासी के दुर्गेंटोला में सुबह अचानक कच्ची छत भरभराकर गिर गई। छत के नीचे बैठे 60 वर्षीय हंसराम और उनके छह वर्षीय नाती मलबे में दब गए। परिजनों और ग्रामीणों ने मिट्टी हटाकर दोनों को बाहर निकाला और जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। एक झटके में परिवार की दो पीढ़ियां खत्म हो गईं और घर में चीख-पुकार मच गई।
आंगन में नाती के साथ बैठे थे हंसराम, पलक झपकते ही छा गया मलबा
बुधवार सुबह करीब आठ बजे हंसराम अपने छह वर्षीय नाती के साथ घर के आंगन में नाद/नापदान के पास कुल्ला कर रहे थे। परिवार के लोग रोजमर्रा के काम में लगे थे। तभी अचानक कच्ची छत भरभराकर दोनों के ऊपर आ गिरी। तेज आवाज सुनकर घर में अफरातफरी मच गई। ग्रामीण भी दौड़ पड़े। आनन-फानन मिट्टी और मलबा हटाया गया तो दोनों बेहोशी की हालत में मिले। परिजन दोनों को अपनी कार से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
पांच साल पहले पात्रता सूची में आया नाम, फिर भी नहीं मिला आवास
हंसराम की पत्नी माया (55) की आंखों के सामने पति और नाती की मौत ने परिवार को तोड़ दिया है। माया का आरोप है कि करीब पांच वर्ष पहले उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लिए आवेदन किया था। उनका नाम पात्रता सूची में भी शामिल था, लेकिन बाद में नाम हटा दिया गया। माया का कहना है, “अगर समय रहते पक्का मकान मिल गया होता तो शायद आज मेरे पति और नाती जिंदा होते।”
खेती से चलता था घर, अब परिवार के सामने सहारे का संकट
हंसराम खेती-किसानी कर परिवार का पेट पालते थे। उनके तीन बेटे भीम (35), सूरज (25) और विकास (20) हैं। सूरज के दिव्यांग होने की बात परिजनों ने बताई है। हादसे में जान गंवाने वाला छह वर्षीय बच्चा भीम और सीमा का बेटा था। जिस घर में सुबह तक परिवार की आवाजें गूंज रही थीं, वहां अब मातम पसरा है। दादा और नाती की मौत से पूरा परिवार सदमे में है।
गरीब की छत पर सवाल
हादसे ने सरकारी आवास योजना के लाभार्थियों के चयन और पात्र परिवारों को पक्का घर मिलने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार का आरोप है कि यदि उसे समय रहते आवास योजना का लाभ मिल गया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की है। अब सवाल यही है कि दो जिंदगियां निगल चुकी इस कच्ची छत की कीमत परिवार को कौन देगा और आवास योजना की सूची से नाम हटने की जिम्मेदारी किसकी तय होगी।


