अतर्रा में कथित झोलाछाप डॉक्टरों ने समेटा कारोबार,
नरैनी, बिसंडा और चिल्ला में भी बंद रहे क्लीनिक, डीएम की गठित उच्चस्तरीय कमेटी से बढ़ी कार्रवाई की उम्मीद
बांदा। जिले में कथित अवैध चिकित्सा कारोबार के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज होने के बाद झोलाछाप डॉक्टरों में खलबली मची हुई है। पत्रकारों द्वारा जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मुलाकात कर बिना मान्यता और फर्जी डिग्रियों के सहारे संचालित हो रहे क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाए जाने के बाद शनिवार को जिले के कई कस्बों में इसका असर दिखाई दिया। अतर्रा, नरैनी, बिसंडा और चिल्ला समेत बांदा शहर के कई इलाकों में कथित झोलाछाप डॉक्टरों ने अपने क्लीनिक बंद रखे।
जानकारी के मुताबिक, अतर्रा में करीब 50 कथित झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक बंद रहे। हालांकि, कुछ स्थानों पर पिछले दरवाजों से मरीजों को देखने और चोरी-छिपे इलाज किए जाने की भी चर्चा रही। नरैनी, बिसंडा और चिल्ला में भी कई क्लीनिकों के शटर बंद दिखाई दिए। बांदा शहर के कालूकुआं, चमरौड़ी और आसपास के इलाकों में भी कथित अवैध क्लीनिकों के बंद रहने की बात सामने आई है।
डीएम की कमेटी से बढ़ी कार्रवाई की उम्मीद
पत्रकारों की शिकायत और मांग के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी नामित की है। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी कार्रवाई का भरोसा देते हुए स्पष्ट किया है कि अवैध रूप से चिकित्सा कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्लीनिक संचालकों की शैक्षिक योग्यता, चिकित्सकीय डिग्रियों और पंजीकरण की जांच किए जाने की बात कही गई है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में अनियमितता मिलने पर संबंधित क्लीनिकों को सील करने के साथ नियमानुसार एफआईआर की कार्रवाई भी की जा सकती है।
फर्जी डिग्री से ऑपरेशन और प्रसव कराने के आरोप
जिले के कुछ क्षेत्रों में दूसरे चिकित्सकों की डिग्रियों और नामों का कथित रूप से इस्तेमाल कर ऑपरेशन, प्रसव और गर्भपात जैसी प्रक्रियाएं कराए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। बबेरू क्षेत्र में भी इस तरह की गतिविधियों को लेकर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता और सुविधाओं के बिना मरीजों को ड्रिप चढ़ाने से लेकर गंभीर उपचार तक किया जा रहा है। पूर्व में शिकायतों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग कुछ स्थानों पर कार्रवाई करते हुए क्लीनिक सील भी कर चुका है।
ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में बिना मान्यता चिकित्सा सेवाएं संचालित होने की शिकायतें लंबे समय से उठती रही हैं। ऐसे में अब जिलाधिकारी की निगरानी में गठित कमेटी की जांच और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से होती है तो अवैध चिकित्सा कारोबार पर अंकुश लगने के साथ मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर भी शिकंजा कस सकता है।


