सीतापुर रेंजर पर किसानों से अवैध वसूली के लगे गम्भीर आरोप

शासनादेशों को ताक पर रखकर छूट प्रजाति के पेड़ों पर दो हजार रुपये प्रति पेड़ मांगने का आरोप

सीतापुर। सदर वन क्षेत्र में तैनात वनक्षेत्राधिकारी सुयश श्रीवास्तव के खिलाफ किसानों से कथित अवैध वसूली एवं रिश्वत मांगने के आरोप सामने आए हैं। प्रेस मीडिया पत्रकार कल्याण संघ के जिलाध्यक्ष अमित यादव द्वारा वनक्षेत्राधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों में शासनादेशों की अनदेखी करते हुए निजी भूमि पर लगे छूट प्रजाति के पेड़ों के पातन एवं अभिवहन की अनुमति के नाम पर किसानों से कथित रूप से धनराशि मांगने की बात कही गई है।आरोप है कि कलमी आम जैसे छूट प्रजाति के पेड़ों की कटान एवं लकड़ी के अभिवहन के लिए नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद किसानों से प्रति पेड़ दो हजार रुपये तक की कथित मांग की जा रही है। मामले को लेकर जिलाध्यक्ष अमित यादव ने संबंधित अधिकारियों से जांच कर कार्रवाई की मांग की है।इसी क्रम में ग्राम आमखेड़ा अशरफपुर, परगना एवं थाना खैराबाद निवासी किसान हेमनाथ पुत्र छेददू का मामला सामने आया है। आरोप के अनुसार किसान की निजी कृषि भूमि गाटा संख्या 105, रकबा 1.2990 हेक्टेयर में कलमी आम के करीब 75 वृक्ष लगे हुए हैं। इन वृक्षों के पातन की अनुमति तथा लकड़ी को नियमानुसार मंडी तक ले जाने के लिए अभिवहन पास प्राप्त करने के उद्देश्य से वन विभाग में आवेदन किया गया था।जिलाध्यक्ष अमित यादव द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक वनक्षेत्राधिकारी सुयश श्रीवास्तव ने कथित तौर पर प्रति पेड़ दो हजार रुपये की मांग की। करीब 75 पेड़ों के हिसाब से यह रकम लगभग डेढ़ लाख रुपये बताई जा रही है। आरोप है कि किसान द्वारा धनराशि देने में असमर्थता जताने पर उसके कागजात वापस कर दिए गए और कथित रूप से बिना पैसा दिए विभागीय कार्रवाई आगे न बढ़ने की बात कही गई।अमित यादव का कहना है कि यदि निजी भूमि पर लगे पेड़ नियमों के तहत छूट प्रजाति में आते हैं और किसान निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर अनुमति मांग रहा है, तो उससे किसी भी प्रकार की अवैध धनराशि की मांग गंभीर मामला है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।वहीं क्षेत्र में पेड़ों के अवैध कटान को लेकर भी पूर्व में शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका और क्षेत्र में पेड़ों के पातन की अनुमति की प्रक्रिया की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।

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