दारानगर में विकास कार्यों के नाम पर बिना कार्य के सचिव कुलदीप ने किया लाखो का फर्जी भुगतान

सचिव-प्रधान की कार्यशैली पर उठे सवाल, धरातल पर काम न होने का आरोप

लहरपुर, सीतापुर। विकासखंड लहरपुर की ग्राम पंचायत दारानगर में ग्राम निधि से किए गए भुगतानों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत में विकास एवं स्वच्छता से जुड़े अलग-अलग कार्यों के नाम पर 2,55,503 रुपये का भुगतान कराया गया, जबकि संबंधित कार्यों के धरातलीय अस्तित्व को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की जांच कराकर सरकारी धन के दुरुपयोग की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।बताया जाता है कि ग्राम पंचायत दारानगर में सचिव कुलदीप कुमार की तैनाती के दौरान कई कार्यों के नाम पर ग्राम निधि से भुगतान किए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान अरविंद कुमार और सचिव की भूमिका की जांच किए जाने की जरूरत है, क्योंकि भुगतान किए गए कार्यों में कई ऐसे हैं जिनके मौके पर होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार रामसरन की बाग से दिनेश के खेत तक मार्ग मरम्मत कार्य के नाम पर 1,65,000 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं बालपुरवा में संपर्क मार्ग निर्माण के नाम पर 45,500 रुपये की धनराशि निकाली गई। ग्रामीणों का आरोप है कि भुगतान की गई धनराशि के अनुरूप मौके पर कार्य नहीं कराया गया और कागजी अभिलेखों के आधार पर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।इसी क्रम में स्वच्छता के लिए चूना एवं ब्लीचिंग पाउडर खरीद के नाम पर 20,010 रुपये तथा ग्राम पंचायत के विभिन्न स्थानों पर वाल पेंटिंग एवं स्लोगन कार्य के नाम पर 24,993 रुपये का भुगतान किया गया। इन भुगतानों को लेकर भी ग्रामीणों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि जिन कार्यों और सामग्री के नाम पर धनराशि निकाली गई, उनका मौके पर सत्यापन कराया जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।चारों मदों में निकाली गई धनराशि को जोड़ने पर कुल भुगतान 2,55,503 रुपये होता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि उक्त धनराशि का भुगतान करने से पूर्व संबंधित कार्यों का स्थलीय सत्यापन किस स्तर पर किया गया। क्या मार्ग मरम्मत और संपर्क मार्ग निर्माण कार्य वास्तव में भुगतान के अनुरूप कराया गया? यदि सामग्री की खरीद हुई तो उसकी आपूर्ति, स्टॉक और उपयोग का विवरण कहां दर्ज है? वहीं वाल पेंटिंग और स्लोगन कार्य की भी मौके पर स्थिति जांच का विषय बनी हुई है।ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम निधि का पैसा गांव के विकास और जनहित के कार्यों के लिए होता है। यदि भुगतान के बाद कार्य धरातल पर नहीं हुए हैं तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है। ऐसे में केवल अभिलेखों के आधार पर मामले को सही मानने के बजाय संबंधित कार्यों का स्थलीय सत्यापन कराया जाना जरूरी है।जब उक्त प्रकरण में एडीओ पंचायत से जानकारी की गई तो उन्होंने बताया की जांच कर कार्यवाही की जाएगी।

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