नरैनी के सरकारी परिसर में राष्ट्रीय ध्वज की दुर्दशा ने व्यवस्था की संवेदनशीलता पर उठाए सवाल
तिरंगा यात्राओं और देशभक्ति के नारों के बीच सामने आई शर्मसार करने वाली तस्वीर
विधायक और मंत्री की चुप्पी पर भी उठेंगे सवाल, जिम्मेदारी तय करने की मांग
अंशू गुप्ता
बांदा। नरैनी के खंड विकास अधिकारी कार्यालय परिसर स्थित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सीएलएफ भवन की छत से सामने आई राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीर ने सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर में तिरंगा बारिश के पानी और बिखरे सामान के बीच पड़ा दिखाई दे रहा है। विडंबना यह है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभर में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए गए। सत्ताधारी दल की ओर से भी जगह-जगह भव्य तिरंगा यात्राएं निकाली गईं और शहर से लेकर गांवों तक देशभक्ति का संदेश पहुंचाया गया। ऐसे माहौल के ठीक एक सप्ताह बाद सरकारी परिसर में तिरंगे की यह स्थिति सामने आना निश्चित रूप से विचारणीय है।
तिरंगा केवल किसी आयोजन का हिस्सा नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, स्वाभिमान और उन असंख्य बलिदानों का प्रतीक है, जिनकी बदौलत देश आजाद हुआ। इसलिए सवाल यह है कि स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम समाप्त होने के बाद राष्ट्रीय ध्वज को सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
मामले को केवल किसी चतुर्थ श्रेणी अथवा संविदा कर्मचारी की गलती बताकर समाप्त करना भी उचित नहीं होगा। यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई हो, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सरकारी परिसर में निगरानी और व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों ने समय रहते ध्यान क्यों नहीं दिया।
यह तस्वीर अब स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के लिए भी सवाल बन गई है। जब तिरंगे के सम्मान को लेकर शहर से लेकर कस्बों व गांवों तक तिरंगा यात्राएं निकाली गईं, तो क्या सरकारी परिसर में राष्ट्रीय ध्वज की ऐसी स्थिति सामने आने पर विधायक और मंत्री भी अपनी चुप्पी बनाए रखेंगे?
मामले को जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर शासन और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने की तैयारी है। मांग है कि जांच केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि यह तय किया जाए कि तिरंगे को इस स्थिति तक पहुंचने से रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी और निगरानी में कहां चूक हुई।


