छिबरामऊ। कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पुलिस प्रशासन पर संगीन अपराधियों को लेन-देन के आधार पर छोड़ने और क्षेत्र में अवैध कारोबार को बढ़ावा देने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं।
गिरफ्तारी के बाद फर्रुखाबाद चौराहे चौकी पर होती है ‘डीलिंग’
क्षेत्रीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि छिबरामऊ पुलिस लूट, छिनैती और अन्य संगीन अपराधों में शामिल अपराधियों को पहले तो हिरासत में लेती है, लेकिन थाने ले जाने के बजाय फर्रुखाबाद चौराहे या आसपास के क्षेत्रों में लाती है। आरोप है कि यहीं पर बिचौलियों के माध्यम से सांठ-गांठ की जाती है और मोटी रकम लेकर अपराधियों को सरेआम छोड़ दिया जाता है। इस कथित साठगांठ के कारण क्षेत्र में बेखौफ घूम रहे लुटेरे फिर से किसी नई वारदात को अंजाम देने निकल पड़ते हैं।
सरेआम फल-फूल रहा जुआ और सट्टे का कारोबार
मामला केवल अपराधियों को छोड़ने तक ही सीमित नहीं है। कस्बे व आसपास के इलाकों में अवैध जुआ और सट्टेबाजी का कारोबार खुलेआम चल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस की कथित सरपरस्ती और अनदेखी के चलते सट्टा माफिया बेखौफ होकर अपनी दुकानें चला रहे हैं, जिससे कई युवा और परिवार बर्बादी के कगार पर पहुंच गए हैं।
जनता में आक्रोश, उच्च अधिकारियों से जांच की मांग
कानून-व्यवस्था की इस बदहाल स्थिति से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे, तो आम आदमी अपनी सुरक्षा के लिए किसके पास जाएगा? क्षेत्रवासियों ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और शासन स्तर के उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की मांग की है।


