बड़रांव ब्लाक के पकड़ी बुजुर्ग की महिलाएं जल जीविका मिशन के तहत महिलाएं तैयार कर रही उत्पाद
जलकुंभी के अन्य उत्पाद के साथ ही तैयार कर रही हैं आकर्षक राखियां
मऊ। तालाबों व झीलों के हानिकारक मानी जाने वाली जलकुंभी से आगामी रक्षाबंधन पर भाइयों की कलाई सजेगी। बड़रांव ब्लाक के पकड़ी बुजुर्ग की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने जल जीविका के सहयोग से पर्यावरण अनुकूल इको फ्रेंडली राखियां बनाना शुरू कर दी है। इन राखियों से भाइयों की कलाई जहां सजेगी वहीं समूह की महिलाओं की अच्छी आमदनी होगी।
जलकुंभी (वाटर हाइसिंथ) को तालाबों और झीलों के लिए एक हानिकारक खरपतवार माना जाता है। इससे न केवल जलीय जीव प्रभावित होते थे बल्कि पानी के गंदा होने से उसमें सड़न पैदा होता है। इसे पर्यावरण संतुलन को भी खतरा माना जाता है। जल जीविका संस्था ने अपने प्रयास से अनोखा प्रयोग कर इसे आय के स्रोत के रूप में परिवर्तित कर दिया है। बड़रांव ब्लाक के पकड़ी बुजुर्ग गांव निवासी समूह की महिलाओं ने जल जीवन मिशन के सहयोग से नदी, तालाबों में उगी जलकुंभी को निकल कर कचरा दूर करने के साथ ही इसके रेसे से चटाई, योगा मैट, बैग, लेडिज पर्स, ट्रे, पेन स्टैंड के साथ-साथ अब इसकी राखियां भी तैयार कर रही है। जल में उगी जलकुंभी से तैयार यह राखियां न केवल भाइयों की कलाई पर सजेंगी बल्कि पर्यावरण की भलाई भी करेंगी।
असम, कोलकाता व बड़े धार्मिक स्थलों पर है इसकी मांग
जलकुंभी से बने उत्पादों की सबसे अधिक मांग असम व कोलकाता के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर, गोरक्षनाथ मंदिर, मथुरा, महाकाल जैसे बड़े धार्मिक स्थलों व पर्यटन केंद्रों पर इसकी मांग अधिक है। पर्यटक इसे महंगे दामों पर खरीद लेते हैं।
रेसा तैयार करने में लगता है समय
जलकुंभी का उत्पाद बनाने के लिए इसके रेसे को तैयार करने में समय व श्रम दोनों ही अधिक लगता है। मई व जून माह में इसे ताल व पोखरे से निकाल कर सुखाया जाता है। इसके उपरांत प्लेटरोलिंग मशीन से प्रेस कर चिकना बनाया जाता है। इसके उपरांत इससे उत्पाद तैयार किया जाता है।
कृषि विज्ञान केंद्र ने सहयोग को बढ़ाया हाथ
जल जीविका मिशन के तहत जलकुंभी से उत्पाद तैयार कर रही समूह की महिलाओं के सहयोग के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डा. विनय कुमार सिंह के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने हाथ बढ़ाया है। केंद्र की खाद्य प्रसंस्करण वैज्ञानिक डा. आकांक्षा सिंह ने महिलाओं को उनके उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही अन्य आय के स्रोतों के बाबत जागरूक किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाला मोरिंगा का पाउडर तैयार करने के बाबत जागरूक किया।
जल से निर्मित उत्पाद का है विशेष महत्व
पवित्र सावन माह में जन में उगे फलों आदि का विशेष महत्व होता है। जल में उगी जलकुंभी से तैयार राखी भाई की कलाई पर बांधना शुभ होगा तथा इससे वोकर फार लोकल को बढ़ावा भी मिलेगा तथा ग्रामीण अंचल की महिलाओं का रोजगार भी बढ़ेगा।
15 महिलाएं तैयार कर रही उत्पाद
जल जीवन मिशन के फिल्ड कोआर्डिनेटर हर्ष दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2025 से अब तक 100 महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, लेकिन वर्तमान में 15 महिलाएं सक्रिय रूप से उत्पाद तैयार कर रही है। बताया कि महिलाएं लेडिज पर्स, बैग, ट्रे, पेन डोल्ची, पेन होल्डर व राखी के साथ-साथ अब लूम पर चटाई व योगा मैट भी तैयार करेंगी।
समूह की महिलाओं का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है। अब इनके हाथ में अच्छी सफाई भी आ गई है। वर्तमान में इनके द्वारा तैयार की गई राखियों को बाजार में बेचा जा रहा है। रक्षाबंधन बीतने के पश्चात अन्य उत्पादों को भी बाजार में भेजवाया जाएगा।- प्रणेश कुमार सिन्हा, प्रोजेक्ट मैनेजर जल जीविका मिशन।


