फ्लाईओवर के नीचे अवैध वाहन पार्किंग का खेल जारी, राहगीर परेशान

ट्रेवल्स के नाम पर दौड़ाए जा रहे प्राइवेट वाहन, राजस्व पर डांका
परिवहन विभाग की निगरानी पर उठ रहे सवाल, सदर कोतवाली पुलिस भी बनी अनजान

सोनभद्र। नगर में करीब तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़ी जमीन पर अतिक्रमण का खेल खुलेआम चल रहा है। कहीं चाय की दुकानें सज गई हैं तो कहीं पार्किंग के नाम पर निजी वाहनों का जमावड़ा लग रहा है। सबसे गंभीर स्थिति सदर कोतवाली से चंद कदम की दूरी पर एलआईसी कार्यालय के पास है, जहां एक ट्रेवल्स संचालक पर फ्लाईओवर के नीचे की जगह को अपने व्यवसाय के लिए इस्तेमाल करने का आरोप है। वाहनों की बेतरतीब पार्किंग से आवागमन बाधित है और कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, ट्रेवल्स के नाम पर संचालित हो रहे इस कथित कारोबार में बिना टैक्सी नंबर वाले निजी वाहनों को भी भाड़े पर चलवाया जा रहा है। निजी नंबर के वाहनों से व्यावसायिक रूप से सवारियां ढोए जाने के आरोप ने परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि निजी वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है तो उनके परमिट, फिटनेस और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच कौन कर रहा है। फ्लाईओवर के नीचे वाहनों की कतार लगने से आसपास की सड़क और आवागमन की जगह प्रभावित हो रही है। राहगीरों को वाहनों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। भीड़भाड़ के समय स्थिति और विकट हो जाती है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों और पैदल राहगीरों के बीच दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उधर प्रकरण को लेकर सदर कोतवाली प्रभारी के सीयूजी नंबर पर काल कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका सीयूजी नंबर आफ रहा। लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका। यातायात प्रभारी ने फ्लाईओवर के नीचे अवैध रूप से संचालित पार्किंग स्थल के सवाल पर कन्नी काटते हुए कहा कि यह मामला नगर पालिका का है। आप नपा के संबंधित अधिकारी से वार्ता करें।

विरोध पर दबंगई का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अव्यवस्थित पार्किंग का विरोध करने पर ट्रेवल्स संचालक और उसके साथ रहने वाले लोग विवाद पर उतारू हो जाते हैं। इससे आसपास के दुकानदारों और राहगीरों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया तो अतिक्रमण और पार्किंग को लेकर विवाद कभी भी गंभीर रूप ले सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला सदर कोतवाली से महज चंद कदम की दूरी का है तो जिम्मेदारों की नजर इस कथित अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग पर क्यों नहीं पड़ रही। वहीं बिना टैक्सी नंबर के निजी वाहनों को कथित तौर पर भाड़े पर चलाए जाने की शिकायत पर परिवहन विभाग की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से फ्लाईओवर के नीचे की जमीन की तत्काल जांच कराकर अतिक्रमण हटाने, वाहनों की अवैध पार्किंग पर रोक लगाने तथा ट्रेवल्स संचालन में लगे वाहनों के परमिट, नंबर प्लेट, फिटनेस और अन्य दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।

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