फतेहपुर। अटेवा पेंशन बचाओ मंच के तत्वाधान में, भारत के सैनिकों के सम्मान में, ओपीएस तिरंगा यात्रा निकाली गई। सर्वप्रथम शिक्षक एवं कर्मचारी नहर कॉलोनी में एकत्रित होकर पटेल नगर चैराहे पर एक साथ जन गण मन एवं वंदे मातरम का गान किया। तत्पश्चात पुरानी पेंशन बहाली व सैनिकों के सम्मान में भारत माता की जयघोष के नारों के साथ अपने हाथों में तिरंगा छाता व झंडा लिए वर्मा चैराहा, ज्वालागंज, सदर अस्पताल, पत्थरकटा चैराहा व विद्यार्थी चैराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां पर उन्होंने सीमा पर डटे जवानों की पुरानी पेंशन बहाली के लिए मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री को संबोधित कर ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा ।इस तिरंगा यात्रा में सम्मिलित हुए मान सिंह यादव स्नातक विधायक झांसी खण्ड ने कहा कि तिरंगा हमारे देश की आन बान शान का प्रतीक है तिरंगे की हिफाजत में भारत के अनेकों वीर सपूतों ने अपने प्राणों का बलिदान किया है। आज भी सीमा पर डटे जवान अपनी जान से ज्यादा तिरंगे का सम्मान करते हैं। वह देश के लिए हंसते-हंसते कुर्बान हो जाते हैं। मगर दुख तब होता है जब सरकार एक दिन के सांसद/विधायक को पांच-पांच पेंशन देती है, लेकिन सीमा पर मर मिटने वाले बीएसएफ, पैरामिलिट्री, सीआरपीएफ के जवानों व 60- 62 वर्ष की सेवा करने वाले शिक्षक एवं कर्मचारियों को एक भी पेंशन नहीं देती। यह कैसा सम्मान है। विनोद सिंह अध्यक्ष उ.प्र.प्रा.शिक्षक संघ ने कहा कि भारत की सरकार खुद को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा करती है किंतु अपने ही शिक्षक कर्मचारियों की बुढ़ापे की लाठी छीन लेती है।ऐसी अर्थव्यवस्था किस काम की जो अपने देश को बढ़ाने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा न कर सके? राजकुमार मौर्य (एड) अध्यक्ष नगर पालिका परिषद फतेहपुर ने यात्रा में शामिल होकर कहा कि सही मायने में अटेवा ने ही तिरंगा यात्रा निकालकर सैनिकों की पुरानी पेंशन की बहाली की मांग कर उन्हें सम्मान दिया है। निधान सिंह जिला अध्यक्ष अटेवा ने कहा कि 2004 -05 से लागू एनपीएस व्यवस्था में शिक्षक कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहा है. यदि सरकार सच में कर्मचारियों की हितैषी है तो एनपीएस, यूपीएस ओपीएस तीनों विकल्प दे दे। शिक्षक कर्मचारी जिसे बेहतर समझेंगे ले लेंगे।


