फसल डूबती रही, सिंचाई विभाग ने नाला साफ कराने पर लगा दी ‘रोक’

करीब दो हजार बीघा धान जलमग्न, पानी निकासी के लिए शुरू हुई जेसीबी भी रुकवाई

सफीपुर उन्नाव। खेतों में धान की फसल पानी में डूबी है, किसान फसल बचाने के लिए अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं और दूसरी ओर जलनिकासी के लिए शुरू कराया गया नाला सफाई का काम सिंचाई विभाग ने रुकवा दिया। निहालपुर-भदनी नाले की सफाई में लगी जेसीबी को एनओसी का हवाला देकर हटवा दिए जाने से किसानों में आक्रोश है। करीब दो हजार बीघा धान की फसल जलमग्न होने का दावा किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि समय रहते पानी नहीं निकला तो मेहनत और लागत दोनों पानी में डूब जाएंगी।
दरअसल, गंगा एक्सप्रेस-वे निर्माण के दौरान करीब एक वर्ष पूर्व डंपरों की आवाजाही के लिए निहालपुर-भदनी नाले की पुलिया के पास मिट्टी डालकर अस्थायी रास्ता बना दिया गया था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी यह मिट्टी नहीं हटाई गई। इसके साथ ही लंबे समय से नाले की सफाई न होने से जलनिकासी की व्यवस्था चरमरा गई। बारिश होते ही नाले का पानी खेतों की ओर फैलने लगा।
किसानों के मुताबिक मुंडा की ओर से आने वाला पानी बृजपालपुर और निहालपुर होते हुए नाले के रास्ते भदनी झाल तक पहुंचता है। रास्ते में अवरोध के कारण पानी का बहाव थम गया और आसपास के खेत तालाब में तब्दील हो गए।

एसडीएम के निर्देश पर चली जेसीबी, पानी निकला तो जगी उम्मीद
समस्या लेकर करीब आधा सैकड़ा किसान एसडीएम फाल्गुनी सिंह के पास पहुंचे। किसानों ने जलनिकासी तत्काल बहाल कराने की मांग की। एसडीएम के निर्देश पर तीन ग्राम पंचायतों के पंचायत सचिवों ने संयुक्त रूप से जेसीबी लगाकर नाले की सफाई शुरू करा दी।
नाले से मिट्टी और कचरा हटते ही पानी का बहाव तेज हुआ। खेतों में जमा पानी निकलने लगा तो किसानों को उम्मीद जगी कि शायद उनकी फसल बच जाए।

शाम होते ही सिंचाई विभाग ने लगाई ब्रेक
लेकिन किसानों की यह राहत ज्यादा देर नहीं टिक सकी। शाम होते-होते सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नाला सफाई का काम यह कहते हुए रुकवा दिया कि बिना एनओसी नाले की सफाई कैसे कराई जा रही है।
काम रुकते ही किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों का सवाल है कि जब जलनिकासी के लिए ग्राम पंचायतें अपने स्तर से जेसीबी लगाकर सफाई करा रही थीं और इसमें सिंचाई विभाग पर कोई आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ रहा था, तो फिर एनओसी की अड़चन डालकर काम क्यों रोका गया?

अधिकारी से विधायक तक दौड़ते रहे किसान
सफाई रुकने के बाद किसान फिर एसडीएम के पास पहुंचे। एसडीएम ने सिंचाई विभाग के एक्सईएन से वार्ता कर जल्द समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने क्षेत्रीय विधायक बंबा लाल दिवाकर से भी मुलाकात की। विधायक ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर अगले दिन सफाई शुरू कराने का भरोसा दिया, लेकिन इसके बावजूद नाला साफ नहीं हो सका।

‘किसकी लड़ाई में डूब रही किसानों की फसल?’
अब किसानों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब फसल बचाने के लिए जलनिकासी जरूरी है, तो नाला सफाई के रास्ते में बार-बार अड़चन क्यों खड़ी की जा रही है?
कुछ किसानों ने पूरे मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका भी जताई है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सवाल यह भी है कि किसानों की फसल और उनकी मेहनत से जुड़े इस मामले में आखिर जिम्मेदारी किसकी है?
फिलहाल नाला सफाई बंद है और खेतों में पानी भरा हुआ है। किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द जलनिकासी नहीं हुई तो करीब दो हजार बीघा धान की फसल बर्बादी की कगार पर पहुंच सकती है। किसानों ने प्रशासन से नाले में जमा मिट्टी हटाने के साथ गंगा एक्सप्रेस-वे निर्माण के दौरान बनाए गए अस्थायी रास्ते को तत्काल हटाकर जलनिकासी बहाल कराने की मांग की है।

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