डी एम बंगले पर फोन के बाद आई बिजली
बिजली गुल होना और फोन रिसीव न होना गोंडा की बनी आम बात नहीं हो रही कार्यवाही, सरकार को कोश रहे उपभोक्ता
गोंडा। शहर में बिजली व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई। शुक्रवार की रात बड़गांव मोहल्ले समेत आसपास की छोटी-छोटी गलियों में करीब चार घंटे तक बिजली गुल रही। भीषण गर्मी और उमस में लोग बेहाल होकर बिजली आने का इंतजार करते रहे, लेकिन विद्युत विभाग के जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला।सबसे बड़ी परेशानी यह रही कि बिजली कटौती के दौरान उपभोक्ताओं ने विद्युत विभाग के एक्सचेंज और संबंधित नंबरों पर कई बार फोन किया, लेकिन फोन उठाने वाला तक कोई नहीं मिला। बिजली के साथ विभागीय फोन व्यवस्था भी मानो अंधेरे में डूबी रही। परेशान उपभोक्ताओं के सामने शिकायत दर्ज कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।बताया गया कि जब मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में लाया गया, तब अधिकारियों की सक्रियता बढ़ी और इसके बाद बिजली आपूर्ति सामान्य हो सकी। सवाल यह है कि आखिर आम उपभोक्ता की शिकायत पर विद्युत विभाग कब जागेगा? क्या समस्या के समाधान के लिए हर बार जिलाधिकारी तक मामला पहुंचाना जरूरी है?गोण्डा में बिजली सप्लाई बाधित होना और शिकायत के लिए फोन न उठना अब आम समस्या बनती जा रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली बिल वसूली में विभाग पूरी तत्परता दिखाता है, लेकिन आपूर्ति बाधित होने पर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी फोन तक उठाना जरूरी नहीं समझते।भीषण गर्मी में घंटों बिजली गायब रहने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उपभोक्ताओं ने शासन और जिला प्रशासन से विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली की जांच कराने तथा लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।उपभोक्ताओं का साफ कहना है कि बिजली कटौती किसी तकनीकी खराबी के कारण हो सकती है, लेकिन शिकायत के समय विभागीय फोन का खामोश रहना व्यवस्था की गंभीर लापरवाही है।

