माखी उन्नाव। बिजली गुल होने के दौरान घर लौट रहे किसान की जिंदगी पीडब्ल्यूडी विभाग के निर्माणाधीन नाले ने छीन ली। घर के सामने बने खुले नाले में गिरने से किसान के पेट में सरिया घुस गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। जिला अस्पताल से कानपुर हैलट ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
माखी थाना क्षेत्र के अकबरपुर दबौली गांव निवासी रूप सिंह (55) पुत्र जगतपाल सिंह खेती-किसानी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। शनिवार देर रात वह खेत से काम निपटाकर घर लौटे थे। बताया जा रहा है कि उस समय गांव में बिजली नहीं थी और अंधेरा छाया हुआ था। घर के सामने पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से नाला निर्माण कराया जा रहा है।
अंधेरे में रास्ता दिखाई न देने के कारण रूप सिंह निर्माणाधीन नाले में जा गिरे। नाले में निकले सरिये में उनका पेट फंस गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। चीख-पुकार सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे और आनन-फानन एंबुलेंस की मदद से उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया।जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने उन्हें कानपुर हैलट रेफर कर दिया। परिजन एंबुलेंस से उन्हें कानपुर लेकर जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी मौत हो गई।
इकलौते बेटे और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल
किसान की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। मृतक की पत्नी मीरा सिंह, इकलौता बेटा अमन और बेटी गोल्डी का रो-रोकर बुरा हाल रहा। परिवार के लोगों का कहना है कि यदि निर्माणाधीन नाले को सुरक्षित किया गया होता और खुले में सरिया न छोड़ा गया होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
ठेकेदार के खिलाफ दी तहरीर
मृतक के बेटे अमन ने निर्माण कार्य करा रहे ठेकेदार के खिलाफ माखी थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। सूचना पर थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच की। संबंधित हल्का दरोगा ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर निर्माणाधीन नाले के खुले गड्ढे और बाहर निकले सरियों को सुरक्षित किए बिना काम कैसे कराया जा रहा था? यदि सुरक्षा के इंतजाम होते तो क्या किसान की जान बच सकती थी? पुलिस जांच के साथ निर्माण कार्य की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठने लगी है।

