अमेठी। आगामी चुनावों को लेकर जिले में राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। विभिन्न दलों के संभावित दावेदार क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं। गांव-गांव जनसंपर्क, बैठकों और सामाजिक आयोजनों में उनकी मौजूदगी बढ़ गई है। टिकट की दावेदारी को मजबूत करने के लिए नेता अपने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन में भी जुटे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। लोगों का कहना है कि चुनाव आते ही नेताओं का गांवों में आना-जाना बढ़ जाता है और वे खुद को जनता का हमदर्द बताने लगते हैं। हालांकि चुनाव बीतने के बाद अधिकांश जनप्रतिनिधि क्षेत्र में कम ही दिखाई देते हैं, जिससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिलती है।
मतदाताओं का कहना है कि इस बार केवल बड़े वादों और भाषणों से बात नहीं बनेगी। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ जनप्रतिनिधियों की उपलब्धता और क्षेत्र में उनकी सक्रियता भी वोट का आधार बनेगी। ऐसे में चुनावी तैयारियों के बीच जनता की कसौटी पर खरा उतरना राजनीतिक दलों और दावेदारों के लिए आसान नहीं होगा।
चुनावी बिसात बिछनी शुरू, जनता बोली— वादों से नहीं, काम से मिलेगा वोट




